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2017-06-21 22:25:05 | Shishir Kant Singh

भारतीय राजनीति खेल , रग्बी के नजरिये से …

वर्तमान समय में भारत कि राजनीति सिर्फ अवसरवादिता रह गयी है। जैसे प्राचीन भारत में बहुत सारी प्रथाएं आयी और लोगो ने उन प्रथाओं को अपने-अपने हिसाब से परिभाषित किया। उसी तरह आज कि राजनीति को पार्टीयां अपने हिसाब से चला रही हैं। "जो मेरी पार्टी कर रही है वोह सही है, बाकी पार्टियां गलत। "


भारतीय नेता ऐसा बर्ताव कर रहे हैं जैसा बंद हो चुकी तमाम फैक्ट्री के यूनियन के लोग करते थे . अभी भारत में ७ राष्ट्रीय पार्टीयां हैं, जिसमे बीजेपी और कांग्रेस बड़ी पार्टियाँ हैं, बाकी ५ राष्ट्रीय पार्टीयाँ भारत के झेत्रीय दलों से भी कम सीट जीतती हैं। आज कल अधिकतर दल आपस में मिलकर कुर्सी हासिल करना चाहते हैं, जो कि भारत के लिए अच्छा और बुरा दोनों हैं।


वैसे भारतीय संविधान के अनुसार सभी को चुनाव लड़ने और पार्टीयाँ बनाने का हक़ है। लेकिन समान उद्देश वाली कई पार्टीयाँ हैं जो आपस में ही लड़ा करती हैं।

२०१४ के लोकसभा चुनाव के लिए सभी पार्टीयाँ रग्बी गेम खेलने के लिए मैदान में आ रही हैं , लेकिन दर्शको को समझ में नहीं आ रहा है कि मैच किसके बीच में होगा ? यहाँ सभी टीम (पार्टीयाँ) खेलने के लिए कुश्ती कर रही हैं , लेकिन भारतीय संविधान के अनुसार सभी टीम (पार्टीयाँ) को मैदान में खेलने के लिए छोड़ दिया गया है। यहाँ मैदान में ३ गोल पोस्ट रखे गये हैं। पहला बीजेपी का, दूसरा कांग्रेस का और तीसरा जो दोनों गोल पोस्ट से सन्तुष्ट नहीं हैं।

 

हर कोई आश्वस्त है कि उनकी टीम जीतेगी। सभी टीमें अपनी-अपनी पोशाकें (टी-शर्ट ) पहन कर तैयार हो रही हैं कि तभी मैदान में हलचल होने लगी , सभी कि नज़र मैदान के गेट पर है , वहाँ से एक नयी टीम (आप पार्टी ) भी खेलने आ रही है , जिसने शर्ट पहन रखी है। सभी टीमें उनको देख कर हंस रही हैं और कह रही हैं कि ये कहाँ खेल पाएंगी। ( वो तो ऐसे कह रही हैं कि जैसे कि वो पहले वर्ल्ड कप सीरीज में वर्ल्ड कप जीत गयी हों। )


खैर मैच शुरू होता है , लेकिन ये क्या - शर्ट वाली टीम ने एक नयी डिमांड रख दी, उनका कहना है कि वो तीनो गोलपोस्ट में से किसी भी तरफ से नही खेलेंगे। तो फिर भारतीय संविधान के अनुसार , चोथा गोल पोस्ट बनाया गया है, जहाँ ट्रैफिक जाम सा नज़ारा देखने लगा है। मैच फिर से शुरू होता है , लेकिन अब शर्ट वाली टीम बाकी टीम के खिडालियों को लंगड़ी मार के गिरा रही है और आगे बढ़ने कि कोशिश कर रही है। ये देख कर छोटी टीमें खबरा कर बहार जाने कि तैयारी कर रही हैं और बड़ी टीमें भी शर्ट वाली टीम से डर रही हैं। उसके बाद बड़ी टीमों ने छोटी टीमों से हाथ छोड़ कर उनके लिए खेलने के लिए रज़ामंदी करवा रही है। कुछ टीमें बड़ी टीमों के साथ मिल गयी, जिसके बाद एक का नाम यूपीए पड़ा और दूसरे का नाम एनडीए हुआ . , लेकिन कुछ टीमें अभी भी सोच में थी। उनका सोचना था कि हारना है तो लड़ के हारेंगे , लेकिन उनके घर वालो ने बोला था कि जीत कर आना , नही तो वहीँ पर अगले मैच तक प्रैक्टिस करते रहना। ये सोच कर बाकी टीमों ने अपना नया ग्रुप (थर्ड फ्रंट ) बनाया शायद ये सोचकर कि "एकता में शक्ति होती है " . अब मैच ४ टीमें खेल रही हैं, सभीअपनी तरफ से ज़ोर आजमाइश लगाये हुए हैं , देखते हैं कौन मैच पर कब्ज़ा जमाता है।

Users comments

1. Very nice

Mridul mishra | 2016-06-22 16:54:00 |

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